In Hindi (हिन्दी में)

shreeramश्री हनुमान मंदिर की महिमा जिस प्रकार काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी मानी जाती है लगभग वही स्थित परम बलशाली रघुकुलनंदन प्रिय बजरंगबली की कनाट प्लेस स्थित मंदिर की है। ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली के हृदयस्थल में विराजमान हनुमानजी तमाम संकटों, दुखों से इस शहर को बचाए हुए हैं। दिल्ली के इतिहासिक और सर्वाधिक प्राचीन मंदिरों में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित भगवान हनुमानजी भवसागर से उद्धार करने के एकमात्र साधन और शरणागत के प्रतिपालक हैं। इनका अनुपम प्रभाव लोकविख्यात है। इनकी शरीर क्रांति प्रतप्त सुवर्ण की सी है। करूणारस समूह से जिनके लोचनकोर भरे हुए हैं।इनकी महिमा मनोहारिणी है, ये स्मरणमात्र से ही भक्तों पर दया करने वाले हैं। अंजना के सौभाग्य और जीवनदान देने वाले कनाट प्लेस वाले हनुमानजी की शरण में जो भी भक्त श्रद्धा के साथ आता है वो भवसागर के संकटों से पार हो जाता है।

वर्तमान हनुमान मंदिर का स्वरूप सन 1724 में श्रद्धालुओं के सम्मुख आया जब तत्कालीन जयपुर रियासत के महाराज जयसिंह ने इसका फिर से जीर्णोद्धार करवाया. उसके पूर्व कनाट प्लेस स्थित भगवान हनुमान का ये दिव्य मंदिर आक्रमण और आततायी अत्याचार के तमाम झंझावातों से भी जूझता रहा था. मुगल शासकों के दौर में इस मंदिर पर कई आक्रमण होने की भी कहानियां भी मंदिर के महंत और श्रद्धालु सुनाते हैं. लेकिन अपने आप में ये बात भी उतनी ही चमत्कार और श्रद्धापूर्ण है कि हनुमान मंदिर के इस बालरूप को कभी भी कोई क्षति नहीं पहुंचा सका. मंदिर के महंत जिनकी पिछली 33 पीढ़ियां यहां बालरूप हनुमान की सेवा करती आ रही हैं बताते हैं कि कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर में आने भक्तों पर बजरंगबली की हमेशा से कृपादृष्टि बरसती रहती है. विधिपूर्वक पूजित होने पर कनाट प्लेस के बजरंगबली सभी मनोरथों की पूर्ति करने वाले सुख समृद्धि की पूर्ति करने वाले हैं. बजरंग बली के इस बालरूप के पूजन की एक और विशेषता है मोदक, लड्डू चढ़ाने वाले भक्तों पर ये विशेष मुदित होते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भों के साथ-साथ इस मंदिर से सर्वधर्म समभाव और सांप्रदायिक एकता की कई मिसालें भी इस मंदिर के साथ जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर को जब काफी समय तक पुत्र प्राप्ति नहीं हुई तब वे कनाट प्लेस के इस मंदिर में आए और पूरी आस्था के साथ पुत्ररत्न की कामना की । और अंतत बजरंग बली की कृपा से सलीम के रूप में उनकी मुराद पूरी हुई. सौहार्द्र की मिसाल के तौर पर मंदिर के विमान पर आज भी ओम अथवा कलश के स्थान पर चांद का चिन्ह अवस्थित है. इस मंदिर की तमाम विशेषताओं में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि ये हनुमानजी के बाल्यकाल को दर्शाने वाले देश का सबसे प्रमुख मंदिर है। यहां बाल हनुमान के एक हाथ में खिलौना और दूसरा हाथ उनके सीने पर है.  ये महावली वीरवर बजरंगबली का ही प्रताप है कि इस मंदिर में 1 अगस्त 1964 से आज तक लगातार श्री राम जयराम जय जय राम का जाप जारी है. जिसके लिए इसे गिनीज बुक में भी शामिल किया गया है।

hanumanशिल्पकला की दृष्टि भी ये मंदिर बेहद उत्कृष्ट कोटि का है. इसके मुख्य द्वार का वास्तुशिल्प रामायण में वर्णित कला के अनुरूप है. मुख्य द्वार के स्तंभों पर संपूर्ण सुंदरकांड की चौपाइयां खुदी हुई हैं. ऐसा माना जाता है कि रामचरित मानस जैसा ऐतिहासिक धर्मग्रंथ लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास 16वीं सदी में जब दिल्ली आए तब वे इस मंदिर में भी दर्शन को आए थे. कहा जाता है कि यही वो पवित्र स्थान है जहां से उन्हें 40 चौपाइयों की हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली .ऐसे संकट मोचन प्रभु श्री हनुमान का स्तवन मानव मात्र के आधि-व्याधि-शोक-संताप-ज्वर का प्रशमन कर विजय प्रदान करने वाला है। जो भी भक्त मन में साध लिए सात शनिवार तक लगातार यहां परिक्रमा करने आता है वो भक्त निश्चय ही मनोवांछित फल पाता है।

दिल्ली के दिल यानी कनाट प्लेस के बाबा खड़ग सिंग मार्ग पर स्थित यह मंदिर कई मायनों में विशिष्ट इसलिए भी है कि इसके एक तरफ गुरुद्वारा बंगला साहिब स्थित है तो वहीं थोड़ी ही दूरी पर मस्जिद और चर्च भी हैं. सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मंदिर में चोला चढ़ाने की खास परंपरा है. चोला चढ़ावे में श्रद्धालु घी, सिंदूर, चांदी का वर्क और इत्र की शीशी का इस्तेमाल करते हैं. कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर की एक अद्भुद चमत्कारिक विशेषता है यहां हनुमानजी लगभग दस साल बाद अपना चोला छोड़कर अपने प्राचीन स्वरूप में आ जाते हैं।

hanuman2इसके अतिरिक्त साल में चार तिथियां इस मंदिर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. दीपावली, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी, और शिवरात्रि के दिन मंदिर में बाल हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दिन भगवान को सोने का श्रंगार किया जाता है। यहां मनौती मानने वाले भक्त बड़ी संख्या में संसारभर से आते हैं और मनौती पूर्ण होने पर भगवान को सवामनी चढ़ाते हैं।

कनाट प्लेस देश और दिल्ली का व्यावसायिक केंद्र होने के साथ ही धर्म और आस्था का भी केंद्र है. और इसमें हनुमान मंदिर की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. इसका सबूत हैं यहां हर दिन दर्शन करने वाले लाखो भक्त। इस लिहाज से कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में महतवपूर्ण भूमिका निभा रहा है. अमूमन देश विदेश से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर में शीश झुकाना नहीं भूलते. मंगलवार और शनिवार भगवान हनुमान के पूजन के दो विशेष दिन हैं. इन दिनों में मंदिर 24 घंटे के लिए खुला होता है. भगवन की आराधना में जलने वाली अखंड ज्योति यहां हमेशा जलती रहती है।

जितना पुराना मंदिर है उतनी ही संपन्न यहां आने वाले भक्तों की फेहरिश्त भी है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर देश विदेश के नामचीन नेताओं और व्यवसायी इस मंदिर में अक्सर आते रहे हैं। हाल के दिनों में एक नया नाम इनके भक्तों की फेहरिश्त में जुड़ा है अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का. अपने भाग्य के प्रतीक के रूप में ओबामा भी हमेशा अपने साथ बजरंग बली की छोटी सी प्रतिमा लेकर चलते हैं।

बाल रवि के समान लाल मुखकमल वाले सीतापति श्रीरामचंद्रजी के प्रधान दूत पवनसुत हनुमान की चर्चा उनके परमपूज्य भगवान श्रीराम के बिना पूर्ण नहीं हो सकती. जगत संकटों के हर्ता बजरंग बली के इस प्राचीन मंदिर में दर्शनार्थियों को इस बात की निराशा कतई नहीं होती है. क्योंकि मंदिर के ही एक हिस्से में राम दरबार की भी स्थापना की गई है. जहां भगवान श्रीराम, अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ पूरी गरिमा से विराजमान हैं. मंदिर के एक हिस्से में परम लोकप्रिय भक्त हितकारी शनिदेव की स्थापना भी है. इसके अतिरिक्त मंदिर परिससर में ही भक्तों की आराधना के लिए गणेशजी, लक्ष्मीजी, दुर्गाजी और संतोषीमाता की भी मूर्तियां पूरे ओज के साथ अवस्थित हैं।